कहते हैं कि जहाँ विज्ञान की सीमाएँ समाप्त होती हैं, वहाँ से आस्था और विश्वास का सफर शुरू होता है। कुछ ऐसा ही अनोखा और रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िला स्थित विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नैना देवी जी के दरबार में देखने को मिला है। पंजाब के होशियारपुर (जैजों दोआबा) के रहने वाले एक श्रद्धालु परिवार के मासूम बच्चे की आँखों की रोशनी माता के आशीर्वाद से पूरी तरह वापस लौट आई है। इस घटना के बाद से न केवल पीड़ित परिवार की खुशियाँ लौट आई हैं, बल्कि मंदिर पहुँचने वाले श्रद्धालुओं का माँ की शक्ति पर विश्वास और भी गहरा हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले इस मासूम बच्चे की आँखों की रोशनी अचानक और पूरी तरह से गायब हो गई थी। अचानक आई इस आपदा से परेशान माता-पिता ने बच्चे को पंजाब के कई बड़े डॉक्टरों और नामी अस्पतालों में दिखाया। भारी इलाज और तमाम कोशिशों के बाद भी जब डॉक्टरों को कोई सफलता नहीं मिली और उन्होंने हाथ खड़े कर दिए, तब निराश परिवार ने हार मानने के बजाय जगदम्बा की शरण में जाने का फैसला किया। मासूम की माँ ने रोते हुए माँ नैना देवी के चरणों में अरदास लगाई और मन्नत माँगी कि यदि उनके लाल की आँखों की रोशनी वापस आ जाती है, तो वे पूरे परिवार के साथ दरबार आकर माता रानी को चाँदी के दिव्य नेत्र अर्पित करेंगे। श्रद्धा और विश्वास की यह पुकार खाली नहीं गई। मन्नत माँगने के महज कुछ ही दिनों के भीतर बच्चे की आँखों में अचानक फिर से रोशनी लौट आई और वह सब कुछ सामान्य रूप से देखने लगा। डॉक्टरों के लिए जो नामुमकिन था, उसे माँ की असीम अनुकंपा ने मुमकिन कर दिखाया। अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए यह श्रद्धालु परिवार हाल ही में श्री नैना देवी जी के मंदिर पहुँचा। उन्होंने माँ के पावन स्वरूप के दर्शन किए, शुकराना अदा किया और वादे के मुताबिक माता के चरणों में चाँदी के नेत्र भेंट किए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन शक्तिपीठ पर सती माता के 'नयन' गिरे थे, इसलिए यहाँ आँखों से जुड़ी समस्याओं को लेकर मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। इस दिव्य घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची आस्था में हर संकट को हरने की शक्ति होती है।