करवा चौथ की पूजा हो चुकी है और अब सुहागिन महिलाएं चांद निकलने का इंतजार कर रही हैं. हालांकि अर्नब तुफान की वजह से देश के कई शहरों में काले बादल छाए हुए हैं, वहीं कुछ जगहों पर प्रदूषण की वजह से साफ चांद दिखने में परेशानी हो सकती है. इस व्रत को करने से पति की आयु बढ़ती है, सेहत ठीक रहती है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है. करवा चौथ की कथा में बताया गया है कि वीरवती ने चतुर्थी का व्रत रखा था, लेकिन उसने चंद्रमा को देखकर व्रत नहीं खोला तो उसके पति की मृत्यु हो गई थी, तो उसने सालभर चतुर्थी के व्रत किए और करवा चौथ पर अपने पति को फिर से प्राप्त किया. करवा चौथ व्रत काफी कठिन होता है क्योंकि पूरे दिन जल, अन्न या किसी भी अन्य वस्तु का सेवन नहीं करते हैं. शाम को वेदी बनाकर उस पर माता पार्वती, शिव जी, गणेश जी और भगवान कार्तिकेय की स्थापना करके विधि विधान से पूजा करते हैं. रात के समय में जब चंद्रोदय होता है तो करवा से चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और फिर पारण करके व्रत को खोलते हैं. आज की रात चंद्रोदय देर से होता है, जिसकी प्रतीक्षा व्रतियों को होती है. आज करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 5:38 बजे से शुरू है. आज करवा चौथ पर गुरुवार व्रत का भी शुभ संयोग बना है. जो पति पत्नी साथ में गुरुवार का व्रत रखकर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके दांपत्य जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और खुशहाली आती है, प्रेम बढ़ता है. करवा चौथ के अवसर पर पति अपनी पत्नी को उपहार और आशीर्वाद देते हैं, वहीं पूजा के समापन के बाद करवा फेरते हैं, महिलाएं अपनी सास से आशीर्वाद लेती हैं और प्रसाद ​बांटती हैं. आज करवा चौथ का चांद देश की राजधानी नई दिल्ली में रात 08:17 बजे निकलेगा. लेकिन हर स्थान और क्षेत्र के आधार पर चंद्रोदय का समय अलग अलग हो सकता है. आइए जानते हैं करवा चौथ की पूजा विधि, मुहूर्त, शुभ योग, मंत्र, आरती, कथा, चांद निकलने का समय, अर्घ्य देने के तरीके से लेकर सबकुछ. आपके शहर में चंद्रोदय का समय क्या है? चंद्रमा की पूजा क्यों करती हैं महिलाएं? ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को मन, शीतलता, शांति और प्रेम का कारक माना जाता है. यही वजह है कि करवा चौथ के दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनाए रखने के लिए शीतलता के प्रतीक चंद्र देव को अर्घ्य देती हैं. चंद्रमा को शाश्वत चक्र और पुनर्जन्म से भी जोड़कर देखा जाता है, इस वजह से स्त्रियां चंद्र देव को ‘अखंड सौभाग्य’ का प्रतीक मानकर पूजा करती हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में से रोहिणी को सबसे ज्यादा प्रेम करते थे. करवा चौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग भी बनता है, जिस वजह से चंद्रमा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. शीतलता के प्रतीक चंद्र देव की पूजा करने से पति की लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. अमृतसर में चांद निकलने का समय: रात 8:11 बजे से 8:22 बजे तक चंडीगढ़ में चांद निकलने का समय: रात 8:12 बजे से 8:17 बजे तक लुधियाना में चांद निकलने का समय: रात 8:11 बजे से 8:20 बजे तक जालंधर में चांद निकलने का समय: रात 8:16 बजे से 8:20 बजे तक पटियाला में चांद निकलने का समय: रात 8:20 बजे मोहाली में चांद निकलने का समय: रात 8:17 बजे पठानकोट में चांद निकलने का समय: रात 8:17 बजे करतारपुर में चांद निकलने का समय: रात 8:20 बजे मोगा में चांद निकलने का समय: रात 8:23 बजे मानसा में चांद निकलने का समय: रात 8:25 बजे करवा चौथ में छलनी का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छलनी किसी भी चीज को छानने के काम आती है. यह प्रतीक है कि छलनी रिश्ते की सारी बुराइयों और नकारात्मक ऊर्जा को रोककर रखती है और अच्छी चीज को आगे बढ़ाती है. यानी कि दांपत्य जीवन में नकारात्मक उर्जा दूर रहे और अच्छाई और प्रेम बना रहे, इसकी कामना करते हुए पति को छलनी से देखने की परंपरा है. चंद्रमा को मन, शीतलता और लंबी उम्र का कारक माना जाता है, छलनी से चंद्रमा को देखने पर उसकी किरणें कई भागों में विभाजित होकर शुभ फल प्रदान करती हैं