अकाली दल (बादल) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया मामले में ₹736.96 करोड़ की ड्रग मनी का खुलासा, विजिलेंस ब्यूरो ने 40,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अकाली दल (बादल) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ अदालत में पेश किए गए 40,000 पन्नों के चालान का हवाला देते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और नशा माफिया के खिलाफ मान सरकार की ऐतिहासिक कार्रवाई करार दिया है।
बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने बताया कि पुलिस स्टेशन विजिलेंस ब्यूरो फ्लाइंग स्क्वॉड मोहाली द्वारा दर्ज एफआईआर नंबर 22 (तारीख 25-06-2025) के तहत मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(ई), 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत यह कार्रवाई की गई है। यह पूरा मामला 2 मार्च 2007 से 31 मार्च 2017 तक अकाली-भाजपा शासन के दौरान आय से अधिक संपत्ति बनाने का है। इसमें विजिलेंस ने अपनी जांच में 719.72 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति और काली कमाई का खुलासा किया है, जबकि जांच में कुल वित्तीय हेराफेरी और मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) का आंकड़ा 736.96 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
विजिलेंस जांच के आंकड़ों का हवाला देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि मजीठिया की संपत्ति में बेतहाशा और संदिग्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुरुआती जांच में 40.78 करोड़ रुपये की संपत्ति में 1200.13% का उछाल पाया गया था। वहीं, 10.3 करोड़ रुपये के शुरुआती आय से अधिक संपत्ति (डीए) के आंकड़े से बढ़ते-बढ़ते बेनामी संपत्तियों की कीमत 50.81 करोड़ रुपये और अंत में 1495.37% की बढ़ोतरी के साथ 719.72 करोड़ रुपये तक जा पहुंची।
पन्नू ने आगे कहा कि 2007 से 2017 का यह वही काला दौर था जब पंजाब में 'चिट्टे' ने दस्तक दी और फैलकर हमारी पूरी पीढ़ी को तबाह कर दिया। एक तरफ पंजाब का आम नागरिक दिन-रात पसीना बहाकर अपने परिवार का खर्चा मुश्किल से चलाता है, वहीं दूसरी तरफ मजीठिया ने पंजाब के नौजवानों की मौतों और बिलखते माता-पिता के आंसुओं की कीमत पर 719 करोड़ रुपये से ज्यादा के नोटों के पहाड़ खड़े कर लिए।
पन्नू ने कहा कि विजिलेंस के चालान में काले धन को सफेद करने के लिए "इसकी टोपी उसके सिर" की तर्ज पर बनाई गई फर्जी (शेल) कंपनियों के पूरे मकरजाल को बेनकाब किया गया है। पंथ और धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले इन नेताओं के असल धंधे शराब और गैर-कानूनी ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट से जुड़े हुए थे। इनमें सरैया इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, पेरेग्रिन सरलोआ ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड, एस.डी. बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, पटियाला में रजिस्टर्ड ए टू जेड ट्रांसपोर्ट, अमरदीप सिंह हुंदल की ए.डी. एंटरप्राइजेज, हरप्रीत सिंह गुलाटी की एचयूवी (यूनाइटेड वाइन), आकाश एंटरप्राइजेज, यूडब्ल्यू एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, एडी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, आकाश स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड और नवांशहर पावर प्राइवेट लिमिटेड (एनपीपीएल) जैसी शेल कंपनियां शामिल हैं, जिनके जरिए अरबों रुपये की हेराफेरी की गई।
वित्तीय हेराफेरी का पूरा ब्योरा देते हुए मीडिया प्रभारी ने बताया कि जांच में 736.96 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं। इनमें सरैया इंडस्ट्रीज के बैंक खातों में 2007-08 से 2008-09 के दौरान जमा कराए गए 170.39 करोड़ रुपये का भारी कैश, विदेशी कंपनियों से सरैया इंडस्ट्रीज द्वारा लिया गया 176.56 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ, साल 2012-13 और 2013-14 में प्राप्त 127.90 करोड़ रुपये का सरप्लस फंड, नवांशहर पावर प्रा. लि. सिंडिकेट ग्रुप से प्राप्त 16.68 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ, सरलोआ इंडस्ट्रीज में 194.62 करोड़ रुपये की अस्पष्ट बढ़ोतरी और 50.81 करोड़ रुपये के बेहिसाबी फंड शामिल हैं।
साजिश की परतें खोलते हुए बलतेज पन्नू ने बताया कि इस मामले में सह-आरोपी हरप्रीत सिंह गुलाटी की गिरफ्तारी के बाद 27 जनवरी 2026 को सप्लीमेंट्री चालान दायर किया गया, जबकि इससे पहले 1 नवंबर 2025 को भी एक सप्लीमेंट्री चालान पेश किया जा चुका था। जांच आगे बढ़ने पर मजीठिया के सगे साले गजपत सिंह ग्रेवाल का नाम सामने आया, जिसे धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत नामजद किया गया है। पन्नू ने याद दिलाया कि जगदीश भोला द्वारा नाम लिए जाने के बाद जब तत्कालीन ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने मजीठिया पर शिकंजा कसना चाहा, तो उनका रातों-रात तबादला करवाकर जांच को दबा दिया गया था। मजीठिया के करीबी गुर्गे सतप्रीत सिंह उर्फ सत्ता और परमिंदर सिंह उर्फ पिंदी, जो सरकारी लाल बत्ती वाली गाड़ियों में घूमते थे, आज कनाडा में छिपे बैठे हैं। मान सरकार लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रही है कि 'प्रत्यर्पण संधि' के तहत उन्हें भारत लाकर पूरे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश किया जाए।
बलतेज पन्नू ने अंत में कहा कि जो लोग इस कार्रवाई को 'राजनीतिक प्रतिशोध' का नाम दे रहे थे, वे विजिलेंस की इन 40,000 पन्नों की चार्जशीट और करीब 300 गवाहों के बयानों को पढ़कर देख लें, पूरा सच सामने आ जाएगा। उन्होंने भाजपा और अकाली दल के बीच खिचड़ी पकने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नशा खत्म करने के लिए 31 दिसंबर 2029 की तारीख तय करना और हरसिमरत कौर बादल द्वारा दिल्ली के हवाले से दिए जा रहे बयान पंजाब को फिर से उसी दलदल में धकेलने की साजिश की तरफ इशारा करते हैं।
पन्नू ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब को नशा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का जो संकल्प लिया है, सरकार उससे पीछे नहीं हटेगी। विजिलेंस ने अपना फर्ज पूरा कर दिया है और अब माननीय अदालत इस महाघोटाले पर अपना अंतिम और सख्त फैसला लेगी।