29 में से 9 गाड़ी कंपनियों ने माना, ई-20 से 2023 से पहले की 30 करोड गाड़ी होंगी खराब- केजरीवाल
-20 पेट्रोल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं, इसके इस्तेमाल से करीब 30 करोड़ पुरानी गाड़ियां खराब हो जाएंगी, लेकिन मोदी सरकार के डर से यह बात सार्वजनिक रूप से लिखकर देने के लिए कोई भी ऑटो निर्माता कंपनी तैयार नहीं है। हालांकि देश में स्थित 29 में से 9 ऑटो कंपनियों ने मीटिंग में यह माना है कि इसके इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों को नुकसान होगा और माइलेज भी गिरेगी। बुधवार को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ये यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल से इथेनॉल महंगा है, माइलेज कम देता है, विदेशी मुद्रा भी नहीं बचती और न किसानों को फायदा है, फिर मोदी जी की इतनी दिलचस्पी क्यों? गाड़ी और पेट्रोल जनता को इस्तेमाल करना है, फिर मोदी सरकार इथेनॉल जबरदस्ती क्यों थोप रही है?
बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 पेट्रोल थोपने के लिए मोदी सरकार पूरी तरह से गुंडागर्दी पर उतर आई है। अभी कुछ दिन पहले मैंने 29 कंपनियों को चिट्ठी लिखी थी। ये 29 वो कंपनियां हैं जो हमारे देश में पेट्रोल पर चलने वाले टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर बनाती हैं। उनसे चिट्ठी में मैंने साफ-साफ लिखकर यह बताने को कहा था कि क्या 2023 से पहले बने हुए उनके वाहनों में ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल किया जा सकता है? मैंने पूछा था कि अगर वे कंपनियां कहती हैं कि इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, तो क्या हमारी गाड़ी खराब होने पर या माइलेज गिरने पर वे हर्जाना देंगी? 29 में से लिखित में तो किसी का भी जवाब नहीं आया, लेकिन नौ कंपनियों के अधिकारियों के साथ फोन पर मेरी लंबी बातचीत हुई।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि 9 कंपनियों के अधिकारियों ने व्यक्तिगत मुझे बताया कि मोदी सरकार खुलेआम धमकी दे रही है। तकनीकी और इंजीनियरिंग के नजरिए से सच्चाई यह है कि अगर 2023 से पहले के वाहनों में ई-20 इस्तेमाल किया जाता है, तो वाहन, उसका इंजन और फ्यूल ट्रेन सिस्टम खराब होगा और माइलेज भी गिरेगी। कंपनियों को मोदी सरकार द्वारा धमकी दी गई है कि अगर उन्होंने पब्लिक में यह बात कही, तो उनकी खैर नहीं है। मोदी सरकार उनका प्लांट बंद करा देगी, ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई की रेड करा देगी और उनकी कंपनी बंद करा देगी। इसलिए वे यह लिखकर नहीं दे सकते। मोदी सरकार दबाव डाल रही है कि वे लिखकर दें कि ई-20 सेफ है। मारुति ने ऐसा लिखकर दिया था, तो उन्हें लेने के देने पड़ गए और कंज्यूमर कोर्ट ने आदेश दिया कि गाड़ी रिप्लेस करके दो। कंपनियों का कहना है कि अगर वे लिखकर देते हैं कि ई-20 सेफ है, तो जनता कोर्ट में जाकर गाड़ी रिप्लेस करने और खराब कॉम्पोनेंट व गिरी हुई माइलेज का हर्जाना मांगेगी, इसलिए वे कुछ भी लिखकर नहीं दे सकते।
अरविंद केजरीवाल ने सवाल किया कि मोदी सरकार कंपनियों पर गुंडागर्दी करके दबाव क्यों डाल रही है? गाड़ी और पेट्रोल जनता को इस्तेमाल करना है, फिर मोदी सरकार इथेनॉल जबरदस्ती क्यों थोप रही है? हमारे देश में 2023 से पहले की बनी हुई 30 करोड़ गाड़ियां हैं, जिनमें 22 करोड़ टू-व्हीलर और 8 करोड़ फोर-व्हीलर हैं। मोदी जी पूरी शिद्दत के साथ इन 30 करोड़ गाड़ियों को कबाड़ बनाने में लगे हुए हैं। इसमें मोदी जी का क्या इंटरेस्ट है? इथेनॉल पेट्रोल से महंगा है, इसकी कैलोरिक वैल्यू कम है जिससे माइलेज कम मिलती है, इससे कोई फॉरेन एक्सचेंज नहीं बचती और किसानों का भी कोई फायदा नहीं होता। इसको लेकर बड़े-बड़े आर्टिकल आ चुके हैं। जहां इथेनॉल बनता है, वहां कई किमी तक अंडरग्राउंड पानी खराब हो जाता है और यह प्रदूषण फैलाता है। ऐसे में इथेनॉल में मोदी जी का इतना इंटरेस्ट क्यों है? यह एक सोचने वाली बात है।