'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026' के संबंध में बनाई गई सात सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी की पहली मीटिंग मंगलवार को पंजाब भवन, चंडीगढ़ में हुई, जिसमें एक्ट के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से भेजे गए सभी टिप्पणियों, एतराज़ों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई। मीटिंग में कमेटी के सभी सदस्य मौजूद थे। इसके अलावा, सीनियर वकील, सीनियर पुलिस अधिकारी, बुद्धिजीवी और कानूनी जानकार खास तौर पर शामिल हुए। कार्यवाही शुरू करने से पहले, सभी सदस्यों ने मूल मंत्र का जाप किया और श्री अकाल पुरख वाहेगुरु जी के चरणों में प्रार्थना की कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए सही दिशा, शक्ति और बुद्धि बख्शी जाए ताकि एक सर्वमान्य समाधान निकाला जा सके। कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा भेजे गए सभी आपत्तियों और सुझावों पर गहराई से विचार किया। सिख पंथ की शिरोमणि संस्था द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हुए, हर मुद्दे पर पूरी चर्चा की गई। कमेटी ने सर्वसम्मति से माना कि श्री अकाल तख्त साहिब एक पवित्र संस्था है और हर सिख का कर्तव्य है कि वह इसकी गरिमा बनाए रखे और इसके आदेशों और दिशा-निर्देशों का पालन करे। कमेटी ने आगे एक प्रस्ताव पास किया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दिए गए सुझावों और बदलावों पर पूरी तरह से विचार किया जाएगा और ज़रूरत के हिसाब से उन्हें शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, कमेटी ने सर्वसम्मति से यह भी माना कि ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ की असली भावना, बुनियादी मकसद और मूल भावना को बरकार रखा जाएगा। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सुझाए गए शब्दों या लफ़जों में ज़रूरी बदलाव, कानून के मुख्य उद्देश्य के साथ समझौता किए बिना शामिल की जा सकती हैं। कमेटी ने दोहराया कि इस एक्ट का मुख्य मकसद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं पर सख्त और असरदार रोकथाम लगाना और ऐसे घिनौने कामों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सख्त सज़ा दिलाना है। सख्त सज़ा से जुड़े ज़रूरी नियमों को किसी भी कीमत पर नरम या कमज़ोर नहीं किया जाएगा। समाज के अलग-अलग हिस्सों और सिख संगत की तरफ से ज़ाहिर की गई चिंताओं को दूर करने और आपसी सहमति बनाने के मकसद से, कमेटी ने एकमत से श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बनाई गई कमेटी के साथ बातचीत करने का फैसला किया है। प्रस्तावित संशोधनों पर जल्दी और पूरी सहमति बनाने के लिए 12 या 13 अक्टूबर को श्री अकाल तख्त साहिब कमेटी के साथ मीटिंग प्रस्तावित है। मीटिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि मीटिंग बहुत साकारात्मक और कंस्ट्रक्टिव माहौल में हुई और चर्चा सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “कमेटी ने संशोधन को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर चर्चा की है और गुरु साहिब की कृपा से इस मुद्दे का जल्द ही समाधान निकल जाएगा।”   ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा, “कमेटी के नतीजे पर पहुंचने से पहले चर्चा की सारी डिटेल्स शेयर नहीं की जा सकतीं। ‘कस्टोडियन’ जैसे खास शब्दों के इस्तेमाल समेत सभी आपत्तियों पर चर्चा की गई। सभी संबंधित पक्षों की राय पर विचार किया जाएगा और धीरे-धीरे आपसी सहमति बनाई जाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मामलों पर कोई भी अकेले फैसला नहीं ले सकता, क्योंकि ये सीधे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की गरिमा और सम्मान से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, "पंजाब सरकार की बनाई कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की बनाई कोऑर्डिनेशन कमेटी मिलकर कोई सही हल निकालेंगे।" अगली मीटिंग के बारे में ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि इसकी तारीख और जगह जल्द ही बताई जाएगी और इशारा किया कि अगली मीटिंग एक हफ़्ते के अंदर हो सकती है। उन्होंने कहा, "एसजीपीसी से भी बातचीत की जाएगी, जबकि दोनों कमेटियां आखिरी फ़ैसले पर पहुंचने से पहले आपस में कोऑर्डिनेट करती रहेंगी।" श्री अकाल तख्त साहिब की सबसे बड़ी बात पर ज़ोर देते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा, "हमारे लिए श्री अकाल तख्त साहिब से बड़ा कोई नहीं है। श्री अकाल तख्त साहिब सबसे बड़ी संस्था है और हर सिख इसके सामने सिर झुकाता है।" उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ़ से उठाई गई आपत्तियों पर मिलकर विचार किया जाएगा और मामले को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। मीटिंग के दौरान चर्चा किए गए कानूनी मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मामले के सभी पहलुओं पर चर्चा हो चुकी है और कमेटी धीरे-धीरे उन पर काम करेगी। कोऑर्डिनेशन कमेटी ने उम्मीद जताई कि वाहेगुरु जी के आशीर्वाद से चल रही बातचीत से मौजूदा चिंताओं को कम करने और एक आसान और सबको मंज़ूर रास्ता निकालने में मदद मिलेगी। 7 मेंबर वाली कमेटी में सिख धार्मिक नेता, रिटायर्ड जज, पुलिस ऑफिसर और लॉ ऑफिसर शामिल हैं। पंजाब सरकार की बनाई गई हाई-लेवल सात सदस्यीय कमेटी में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के चीफ संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, जस्टिस (रिटायर्ड) जसपाल सिंह, जस्टिस (रिटायर्ड) गुरबीर सिंह, जतिंदर सिंह औलाख आईपीएस (रिटायर्ड), और लॉ ऑफिसर प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल थे।