काँग्रेस ने अपनी सरकार में बनाया नाजायज कांग्रेस भवन ओर मार्केट,अब नगर निगम करेंगी ध्वस्त
BURNING NEWS✍️RAJESH SHARMA
पंजाब में काँग्रेस राज में बना कांग्रेस भवन अब नगर निगम तोड़ेगी, कागज़ों में ख़ाली प्लाट पर उस पर नाजायज निर्माण ओर बाहर मार्केट पूरी तरह नाजायज है, जिसको लेकर अदालत ने उसे तोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। 2016 में कांग्रेस भवन को ध्वस्त करने काटे आदेश आए थे पर उसके बाद किसी ने कोई अपील नहीं लगाई जिसके बाद आज अदालत ने दुकानदारों की अर्ज़ी ठुकरा दी है।
करीब 40 साल पहले स्थापित जालंधर के कॉंग्रेस भवन को नगर निगम जालंधर गिराने जा रहा है। साबित हो चुका है कि कॉंग्रेस भवन का निर्माण बिना किसी नक्शे के किया गया था और कमाई के लिए भवन के बाहर गैर कानूनी ढंग से दुकानों का निर्माण किया गया था।
नगर निगम जालंधर को आज की तारीख से यह अधिकार मिल गया है कि वो आने वाले दिनों में कॉंग्रेस भवन को बिना नोटिस गिरा सकता है औऱ अवैध निर्मित दुकानों को ध्वस्त कर सकता है। इस मामले को लेकर यहां के कॉंग्रेस प्रधान का ब्यान अभी सामने नहीं आया है।
सेशन कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद 2013 में कॉंग्रेस पार्टी की तरफ से कोई चुनौती नहीं दी गयी थी। हालांकि कुछ दुकानदारों ने उनको बिना सुने फैसला करने का वाद दायर किया था जो आज खारिज कर दिया गया और साल 2016 के तत्कालीन एडिशनल सेशन जज गुमनाम सिंह ढिल्लो को बहाल माना है।
2016 में सेशन जज ने क्या लिखा था ऑर्डर, पढ़िए
"ऊपर की चर्चा को देखते हुए, यह अपील खारिज की जाती है। इसे बिना किसी खर्च के खारिज किया जाता है। इस मामले में, अपील करने वालों ने लगभग 30 साल पहले एक अवैध निर्माण किया था। जालंधर नगर निगम के अधिकारी इस अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहे, क्योंकि उस समय यह अवैध काम सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी ने किया था। जागरूक और जनहित चाहने वाले नागरिकों, यानी प्रतिवादी नंबर 4 और 5 द्वारा पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में सिविल रिट याचिका नंबर 16242/2012 (डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटी बनाम एम.सी. जालंधर) दायर करने के बाद ही जालंधर नगर निगम अपनी गहरी नींद से जागा। यह ध्यान देना ज़रूरी है कि 10.06.2013 को आदेश पारित होने और इस कोर्ट द्वारा उस आदेश के अमल पर रोक लगाने का कोई आदेश न होने के बावजूद, नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहे। मुझे डर है कि इस अपील में आदेश पारित होने के बाद भी, नगर निगम के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर पाएंगे। इन हालात में, यह आदेश दिया जाता है कि अपीलकर्ता नंबर 1 और 2 आज से 15 दिनों के भीतर अपने खर्च पर अवैध निर्माण को गिरा दें। 15 दिनों की यह अवधि खत्म होने पर, जालंधर नगर निगम के पास अवैध निर्माण को गिराने और गिराने का खर्च अपीलकर्ताओं से वसूलने के लिए 15 दिनों का समय होगा। अगर दोनों में से कोई भी पक्ष इस कोर्ट के आदेश के अनुसार निर्माण को नहीं गिराता है, तो प्रतिवादी नंबर 4 और 5 उस निर्माण को गिराने और अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहने वाले नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए इस कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने के कानूनी रूप से हकदार होंगे। खर्च का ब्यौरा तैयार किया जाए। फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेज दिया जाए।"