मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज दोहराया कि श्री अकाल तख्त साहिब हम सभी के लिए सर्वोच्च हैं और उनकी सरकार बेअदबी के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी ढांचे को सुनिश्चित कर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। राज्य सरकार द्वारा गठित सात सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी के साथ हुई विस्तृत बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बेअदबी करने वालों के लिए उम्रकैद और भारी जुर्माना इस कानून का मुख्य आधार हैं और इसमें कोई ढील नहीं दी जा सकती। आज यहां मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ की कुछ धाराओं को लेकर उठाई गई आशंकाओं तथा विचार-विमर्श और आपसी सहमति के माध्यम से इनके समाधान पर चर्चा की गई। उन्होंने कमेटी को निर्देश दिया कि प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा की जाए, सुझावों पर विचार किया जाए और सहमति बनाने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ विस्तृत एवं निरंतर बैठकें की जाएं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि यह कानून श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के प्रति अपनी मूल भावना पर कायम रहे और सिख संगत के आहत हृदयों पर मरहम लगाने का काम करे। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ इस कानून की धाराओं पर चर्चा करने और सहमति बनाने की दिशा में काम करते समय इस कानून की मूल भावना और मुख्य उद्देश्य से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। बेअदबी करने वालों के लिए उम्रकैद और भारी जुर्माने की व्यवस्था इस कानून का मुख्य आधार है। इसलिए इसमें कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए।” मुख्यमंत्री ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि इस कानून ने बेअदबी की बार-बार हो रही घटनाओं के कारण सिख संगत के आहत हृदयों को राहत प्रदान की है। पहली बार ऐसा घिनौना अपराध करने के बारे में सोचने वालों में भय की भावना पैदा हो रही है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य बेअदबी के दोषियों के लिए सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी व्यक्ति कभी भी ऐसा गंभीर अपराध करने का साहस न कर सके। ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ की कुछ धाराओं को लेकर कुछ आशंकाएं व्यक्त की गई हैं और हम इन आशंकाओं पर पूरी तरह विचार करने के लिए तैयार हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस उद्देश्य के लिए हमारी सरकार ने धार्मिक क्षेत्र से जुड़ी प्रतिष्ठित शख्सियतों, बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों वाली सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेगी और राज्य सरकार को उचित मार्गदर्शन देने से पहले कानून के प्रत्येक पहलू की गहन समीक्षा करेगी।” मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, ताकि सभी कानूनी, संवैधानिक और अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोई उचित समाधान निकाला जा सके। मैंने नोडल अधिकारी, पी.सी.एस. हरजीत सिंह संधू को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की बैठकों के लिए पूर्ण समन्वय सुनिश्चित करें और कमेटी को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाएं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैंने कमेटी के सदस्यों को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ लगातार बैठकें करने के लिए कहा है, ताकि आपसी विचार-विमर्श और सहमति के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार कानून में जरूरी संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसके लिए निरंतर बैठकें की जानी चाहिए, ताकि दोनों पक्षों की संतुष्टि के बाद सर्वसम्मति बनाई जा सके।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब हम सभी के लिए सर्वोच्च हैं और मैं स्वयं को सौभाग्यशाली समझता हूं कि मुझे बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाकर सेवा करने का अवसर मिला है। हमारी सरकार इस पूरी प्रक्रिया को पूर्ण सम्मान और संवेदनशीलता के साथ पूरा करेगी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह विधेयक कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था, जिसका स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इसमें ऐसी कोई कमी या खामी न रह जाए, जो भविष्य में इसकी प्रभावशीलता को कमजोर कर सके। जब भी बेअदबी की कोई घटना होती है तो यह लोगों के हृदय और भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने बिल्कुल नया कानून लाने के बजाय मौजूदा कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया, ताकि संशोधित कानून को मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जा सके। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी ढांचा मजबूत और प्रभावी बना रहे तथा हर जायज कानूनी और संवैधानिक चिंता का समाधान भी किया जा सके।” उन्होंने कहा, “हमारी सरकार एक सख्त कानून बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि बेअदबी करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सख्त से सख्त सजा निर्धारित की जा सके। अतीत में हुई बेअदबी की घटनाओं ने सिख संगत की भावनाओं और मन को गहरी ठेस पहुंचाई है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और मर्यादा की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़ी भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं और कानून बेअदबी के विरुद्ध सबसे मजबूत ढांचा प्रदान करना सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने कहा, “प्रस्तावित संशोधनों को अत्यंत संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ, संवैधानिक एवं कानूनी सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता पूरी तरह सुरक्षित रहनी चाहिए और कानून अपने निर्धारित उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा करना चाहिए ।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आशा व्यक्त की, “कमेटी का विचार-विमर्श सिख पंथ की भावनाओं के अनुरूप सकारात्मक परिणाम की ओर जाएगा और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे को और मजबूत करेगा।” बैठक में शामिल सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल का प्रतिनिधित्व कर रहे बाबा साहिब सिंह, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जसपाल सिंह, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गुरबीर सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) जतिंदर सिंह औलख तथा कानूनी अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल थे। दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने बैठक में ऑनलाइन भाग लिया। इस अवसर पर पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के निदेशक एल.के. यादव, अधिवक्ता जी.एस. घुम्मण और जी.पी.एस. घुम्मण के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।