BURNING NEWS✍️RAJESH SHARMA
जालंधर के सिविल अस्पताल में रविवार को हुई 3 मरीज़ों की मौत मामले में जांच कमेटी की प्राथमिक रिपोर्ट में एक खुलासा हुआ है। ख़ुलासे के बाद जालंधर सिविल अस्पताल के बड़े डाकटरो में खलबली मच गई है क्योंकि रिपोर्ट में लापरवाही बड़े अधिकारियों की सामने आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार घटना के समय अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट अधीनस्थ कर्मचारियों (दर्जा चार कर्मचारियों) के सहारे चल रहा था, जबकि यह काम तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों का होता है। अगर ऐसा हुआ तो सिविल अस्पताल के बड़े अधिकारियों पर कारवाई होनी तय है, हालाँकि मेडिकल सुपरिडेंट ने मौतों के तुरंत बाद अपना पल्ला झाडने के लिए तुरंत 9 सदस्यीय कमेटी बनाई थी पर सेहत मंत्री ने इस कमेटी को तुरंत भंग करके चंडीगढ़ टीम की ड्यूटी जाँच के लिए लगाई थी।  आक्सीजन प्लांट में दर्जा चार कर्मी का ड्यूटी करना सीधा सीधा ये दर्शाता है कि मरीज़ों की मौत हादसा नहीं बल्कि बड़ी लापरवाही है। 

जांच कमेटी ने पाया कि जिस अधीनस्थ कर्मचारी की ड्यूटी ऑक्सीजन प्लांट पर लगाई गई थी, वह पहले अलग-अलग वार्डों में अस्थायी ड्यूटी करता रहा है। यानी ऑक्सीजन प्लांट संचालन का उसके पास कोई तकनीकी अनुभव नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार यही लापरवाही उस समय घातक साबित हो सकती है।

पोस्टमॉर्टम न होने से असली कारण नहीं हुआ स्पष्ट

हालांकि, मौतों का असली कारण अब भी स्पष्ट नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि किसी भी मृतकों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया, क्योंकि यह पुलिस केस नहीं था और परिजन भी शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराना चाहते थे। ऐसे में यह पुष्टि नहीं हो पाई कि मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई में आई दिक्कत के कारण हुईं या मरीजों की गंभीर हालत के चलते।

घटना के बाद सोमवार को सिविल अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट की मरम्मत की गई। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि प्लांट की कार्यप्रणाली की जांच की जा रहा है और उसकी तकनीकी खामियों की पड़ताल की जा रही है। जांच कमेटी की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई उसी आधार पर की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही पाई गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।