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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव धीरे-धीरे अन्य देशों के लिए बड़ी परेशानी बनकर उभर रहा है। भारत में भी इसका असर देखने को मिलकर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में दी गई ब्रीफिंग के बाद, सरकार ने आधिकारिक तौर पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, ताकि बदलती स्थिति और भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया पर चर्चा की जा सके।
यह बैठक बुधवार, 25 मार्च, 2026 को शाम 5:00 बजे संसद भवन में होनी है। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक एकता का प्रदर्शन करना और दुनिया को यह संदेश देना है कि भारत गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों के मामले में पूरी तरह एकजुट है।
मुख्य उपस्थित लोगों में शामिल होंगे:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
गृह मंत्री अमित शाह
विदेश मंत्री एस. जयशंकर
सभी प्रमुख विपक्षी दलों के सदन के नेता
इस बातचीत के जरिए, सरकार का लक्ष्य विपक्ष को विश्वास में लेना और संघर्ष के संबंध में एक साझा राष्ट्रीय रणनीति तैयार करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए समर्पित रूप से काम करने हेतु मंत्रियों और सचिवों के एक समूह के गठन का निर्देश दिया है।
राहुल गांधी मीटिंग में पेश नहीं हो रहे। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि संकट पर उनका बयान “पहले से तैयार किया गया भाषण है, जो पिछले 11 वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों की आत्म-प्रशंसा से भरा है अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। इन समुद्रों में चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य काम करते हैं।
उन्होंने कहा था, “इन विभिन्न कारणों से, भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि इस संकट पर भारत की संसद से एक सर्वसम्मत और एकजुट आवाज दुनिया तक पहुंचे।”









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