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उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है, जो कि कुछ संतों और गंगा सभा की मांग पर आधारित है, जिसका उद्देश्य धार्मिक पवित्रता बनाए रखना और 2027 के अर्धकुंभ से पहले नियमों को लागू करना है, जिससे गंगा नदी के घाटों पर अनुचित गतिविधियों (जैसे शराब, अश्लीलता) को रोकना है और इन घाटों को ‘पवित्र शहर’ के रूप में संरक्षित करना है, जबकि यह 1916 के पुराने नियमों का भी अध्ययन कर रही है।
मुख्य बिंदु:
- प्रस्ताव का आधार: कुछ साधु-संतों और गंगा सभा (जो हरकी पैड़ी की देखरेख करती है) की मांग है कि हरिद्वार के सभी 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए।
- कारण: धार्मिक स्थलों की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखना, खासकर हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे क्षेत्रों में, जहां कुछ वीडियो में अनुचित गतिविधियों को दिखाया गया है।
- : 1916 के ब्रिटिश काल के नियमों का हवाला दिया जा रहा है, जिसमें गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक थी, और सरकार इन नियमों का अध्ययन कर रही है।
- उद्देश्य: हरिद्वार और ऋषिकेश को ‘पवित्र नगर’ घोषित करने की योजना के तहत धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना, खासकर आगामी 2027 अर्धकुंभ से पहले।
- विभिन्न विचार: कुछ लोगों का मानना है कि यह संवैधानिक मूल्यों (समानता, धार्मिक स्वतंत्रता) के खिलाफ है, जबकि अन्य इसे धार्मिक स्थानों की पवित्रता के लिए आवश्यक मानते हैं









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